सोलर पैनल के नीचे कबूतरों का घोंसला और बीट (Pigeon Droppings): हो सकता है 30% बिजली का नुकसान!
भारतीय शहरों में रूफटॉप सोलर लगाने के कुछ ही महीनों बाद कबूतरों का झुंड पैनलों के नीचे डेरा जमा लेता है। पैनलों के नीचे की 4 से 6 इंच की खाली और गर्म जगह कबूतरों को अंडे देने और घोंसला बनाने के लिए सबसे सुरक्षित लगती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि कबूतर आपके ₹2 लाख के सोलर सिस्टम को बर्बाद करने वाले सबसे बड़े दुश्मन हैं? आइए जानते हैं कबूतरों से होने वाले 3 बड़े नुकसान और उनका आसान समाधान।
1. वायरिंग चबाना और शॉर्ट सर्किट (DC Cable Damage)
कबूतर और चूहे सोलर पैनल के नीचे लटकने वाली 4 sqmm डीसी सोलर केबल और MC4 कनेक्टर्स को चोंच मार-मारकर काट देते हैं। खुली हाई-वोल्टेज डीसी तार में स्पार्किंग होने से पूरे सिस्टम में आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है।
2. कबूतरों की बीट से हॉट-स्पॉट (Hot-Spot Burnout)
कबूतर की बीट में यूरिक एसिड और गाढ़ा सफेद रसायन होता है जो पैनल के शीशे पर पत्थर की तरह चिपक जाता है और बारिश के पानी से भी नहीं छूटता:
- बीट वाला सेल पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है। बाकी पैनल बिजली पैदा कर रहे होते हैं लेकिन वह अकेला सेल बिजली बनाने के बजाय रेजिस्टर (हीटर) बन जाता है।
- इससे सेल का तापमान 150°C तक पहुंच जाता है और सोलर पैनल अंदर से जल (Burnout) जाता है, जिसे Hot-Spot कहते हैं।
🛡️ एकमात्र स्थायी समाधान: सोलर बर्ड मेश (Bird Proofing Net)
सोलर पैनल के चारों किनारों पर पीवीसी कोटेड गैल्वेनाइज्ड स्टील वायर मेश (Solar Bird Mesh) लगवाएं। इसे बिना किसी स्क्रू या ड्रिलिंग के विशेष UV-रेसिस्टेंट नायलॉन क्लिप्स से पैनल के एल्युमिनियम फ्रेम में फिक्स किया जाता है, जिससे पैनल की वारंटी भी प्रभावित नहीं होती।
✅ खर्च और बचत
3kW सिस्टम के चारों तरफ बर्ड मेश लगवाने में मात्र ₹2,500 से ₹3,500 का खर्च आता है, लेकिन यह आपके सिस्टम को 25 साल तक चूहों और कबूतरों के लाखों रुपये के नुकसान से बचाता है।